इस हफ्ते फ्लाईदुबई विमान में को-पायलट के हमले ने न सिर्फ उसकी मंशा, बल्कि उस सुरक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठे, जिससे अधिकांश कमर्शियल एयरलाइन पायलटों को गुजरना होता है। यह सवाल इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक हमाम अल-हम्मामी को ओमान एयर ने 2025 में ही कट्टरपंथी विचारों की वजह से फ्लाइट ट्रेनिंग से हटा दिया था। उसके सोशल मीडिया पर आतंकवादी तस्वीरें थीं। इसके बावजूद वह फ्लाईदुबई का विमान उड़ा रहा था। यह उजागर करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरलाइंस के बीच पायलटों की पृष्ठभूमि की जानकारी साझा करने की कोई मजबूत व्यवस्था नहीं है। एक एयरलाइन जिस पायलट को खतरनाक मानकर हटाती है, दूसरी एयरलाइन उसे बिना पूरी जांच के नौकरी दे सकती है।
एक फ्लाइट में चार पायलट क्यों थे? क्या यह सामान्य है?
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, आमतौर पर एयरलाइंस छोटी उड़ानों में अतिरिक्त पायलट तैनात नहीं करतीं क्योंकि दो पायलट दलों को एकसाथ भुगतान करना महंगा है। रिटायर्ड एयरलाइन कैप्टन और एविएशन सेफ्टी कंसल्टेंट जॉन कॉक्स ने बताया, हम दुनियाभर में पायलटों को मूव करते रहते हैं। अतिरिक्त पायलट डेडहेडिंग में थे। यानी अगली फ्लाइट के लिए खुद को सही जगह पहुंचाने के लिए सफर कर रहे थे। पायलट बेहद प्रशिक्षित होते हैं, लेकिन उतने ही महंगे भी। कारोबार के नजरिए से आप सही वक्त पर सही जगह सही संख्या में पायलट चाहते हैं। आप जरूरत से ज्यादा के लिए भुगतान नहीं करना चाहते।
दूसरी संभावना यह भी है कि फ्लाईदुबई को वापसी की उड़ान के लिए दूसरे क्रू की जरूरत थी क्योंकि ऑपरेटिंग क्रू अपनी कानूनी ड्यूटी लिमिट पार कर चुका होता। एक पायलट के लिए काम का नियमित वक्त सिर्फ हवा में बिताए घंटे नहीं होते। एयरपोर्ट पर रिपोर्टिंग से लेकर टैक्सी-वे, देरी और ग्राउंड टर्नअराउंड तक सब जुड़ता है। जहां तक फ्लाईदुबई की बात है तो उसने इस फ्लाइट में अतिरिक्त पायलटों की मौजूदगी के बारे में सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।
क्या पश्चिम एशिया संकट की वजह से ऐसा हुआ?
एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट सैली लेइवेस्ले ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए छोटी उड़ानों में भी बैकअप क्रू रखना समझ में आता है। उन्होंने कहा, “जब इलाके में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा रही हों, तो आप अपना विमान उस क्षेत्र में नहीं उड़ाना चाहते इसलिए खतरा टलने तक उड़ानें रोकी जा सकती हैं और इस देरी के लिए अतिरिक्त क्रू की जरूरत पड़ती है।” हालांकि, लेइवेस्ले का कहना था कि उन्हें कोई संकेत नहीं मिला कि ऑफ-ड्यूटी पायलट किसी खास सुरक्षा चेतावनी की वजह से बोर्ड पर थे।
हमलावर को-पायलट कौन था और उसकी कट्टरपंथी सोच के बारे में पहले पता क्यों नहीं चल पाया?
सीएनएन ने दो सूत्रों और एक इस्राइली अधिकारी के हवाले से बताया कि हमलावर का नाम हमाम अल-हम्मामी है। वह ओमानी नागरिक है। वह यूएई में पैदा हुआ था। उसके पिता ओमानी और मां सीरियाई है। वह सात साल ओमान एयर में रहा और फरवरी 2025 में हटाया गया। इसके बाद जून 2025 में रॉयल एयर मैरोक से जुड़ा और जनवरी 2026 में वहां से भी उसने नौकरी छोड़ दी। उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल में फ्लाईदुबई का कोई जिक्र नहीं था। प्रोफाइल बाद में डिलीट कर दिया गया।
सीएनएन के दूसरे सूत्र एक क्षेत्रीय राजनयिक ने बताया कि अल-हम्मामी को कट्टरपंथी विचारों की आशंका की वजह से फ्लाइट ट्रेनिंग से हटाकर ओमान एयर में दूसरी जिम्मेदारी दी गई थी। उसके सोशल मीडिया पर आतंकवादी तस्वीरें भी मिली हैं।
विमान उड़ता रहा, यह कैसे संभव हुआ?
रिटायर्ड एयरलाइन कैप्टन रिचर्ड लेवी ने कैप्टन स्मित मच्छार और इस्राइली यात्रियों की बहादुरी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह असाधारण था कि जख्मी कैप्टन ने हमले के दौरान दरवाजा खोला और इमरजेंसी सिग्नल भेजा। लेकिन उन्होंने एक और चौंकाने वाली बात कही। वह यह कि जब विमान तेज रफ्तार से नीचे आ रहा था, तब उसका ‘रडर’ क्षतिग्रस्त हो गया था। यह चमत्कार है कि विमान उड़ने लायक रहा। बता दें कि रडर विमान की टेल में लगा होता है, जिससे विमान को दाएं या बाएं घुमाने में मदद मिलती है।
तबाही और बचाव के बीच कितनी पतली रेखा थी?
एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट सैली लेइवेस्ले ने अनुमान लगाया कि विमान उस बिंदु से सिर्फ पांच सेकंड दूर था, जहां से उसे रिकवर करना असंभव हो जाता और वह क्रैश होना तय होता। वह कहती हैं कि जिंदगी और मौत के बीच की दूरी काफी कम थी। सही समय पर विमान पर दूसरे पायलटों ने काबू पाया और उसे और नीचे आने से बचाया।
इस्राइल की हवाई सुरक्षा इतनी मजबूत है, फिर यह हमला कैसे हो गया?
इस्राइल की विमानन सुरक्षा दुनिया में सबसे मजबूत मानी जाती है। द टाइम्स ऑफ इस्राइल के अनुसार चेक-इन से पहले हर यात्री से सुरक्षा अधिकारी बात करते हैं। यह संदिग्ध व्यवहार पकड़ने के लिए होता है। सभी इस्राइली एयरलाइंस की हर अंतरराष्ट्रीय उड़ान में सशस्त्र एयर मार्शल होते हैं। कुछ विमानों में एंटी-मिसाइल सिस्टम लगे हैं। कॉकपिट के दरवाजे बुलेटप्रूफ हैं, जो उड़ान के दौरान हमेशा बंद रहते हैं। डबल-डोर सिस्टम होता है। इसमें एक दरवाजा हमेशा बंद। इस्राइली वायुसेना भी इस्राइल की ओर आने वाले विमानों की निगरानी करती है। एक इस्राइली विमानन सुरक्षा पेशेवर ने बताया कि असली समस्या यह है कि दुबई से आने वाली उड़ानों में एक भी एयर मार्शल नहीं होता।
चुनौती क्या है?
द टाइम्स ऑफ इस्राइल के अनुसार, इस्राइल विदेशी एयरलाइनों पर एयर मार्शल, कॉकपिट सुरक्षा या प्री-बोर्डिंग चेक से जुड़े नियम नहीं थोप सकता। सबसे बड़ी खामी यह है कि इस्राइल विदेशी पायलटों की तब तक जांच नहीं कर सकता, जब तक वे विमान के अंदर हैं। इस्राइल अक्सर दूसरे देशों के साथ समझौते करता है कि कुछ देशों के पायलट इस्राइल के लिए विमान नहीं उड़ाएंगे, लेकिन किसी कारण से ओमानी पायलट को इस्राइल जाने वाली फ्लाइट उड़ाने से नहीं रोका गया। ऐसा क्यों हुआ, यह सवाल अब भी बरकरार है।
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