दिल्ली में एक कार मालिक को वाहन चोरी होने के बाद बीमा दावा खारिज किए जाने के मामले में करीब 8 लाख रुपये की राहत मिली है। बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज किया था कि कार का ज्यादा माइलेज उसके व्यावसायिक इस्तेमाल की ओर इशारा करता है और घर से करीब 500 मीटर दूर कार पार्क करना मालिक की लापरवाही थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी के इन तर्कों को “बेबुनियाद और मनमाना” बताया।
आयोग ने बीमा कंपनी को चोरी हुई कार के लिए 7,74,005 रुपये, साथ ही मानसिक परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 30,000 रुपये देने का आदेश दिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के एक कार मालिक की गाड़ी चोरी हो जाने के बाद बीमा कंपनी ने दो मुख्य आधार बनाकर क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया था:
- कमर्शियल इस्तेमाल का आरोप: बीमा कंपनी का दावा था कि कार का इस्तेमाल प्राइवेट के बजाय कमर्शियल (व्यावसायिक) काम के लिए किया जा रहा था। इसके सबूत के तौर पर कंपनी ने कार के हाई माइलेज (ओडोमीटर रीडिंग) का हवाला दिया। कंपनी के मुताबिक, खरीदने के महज 2 महीने में कार 6,500 किलोमीटर से ज्यादा चल चुकी थी और FASTag टोल डेटा से पता चला कि गाड़ी हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड में भी चली थी।
- लापरवाही से पार्किंग का आरोप: बीमा कंपनी का दूसरा तर्क यह था कि मालिक ने गाड़ी को अपने घर से लगभग 500 मीटर दूर पार्क किया था, जो कि सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाता है और इससे चोरी आसान हो गई।
चोरी की यह पूरी घटना क्या थी?
पीड़ित कार मालिक ने अपनी प्राइवेट कार के लिए 34,004 रुपये प्रीमियम देकर 7,74,005 रुपये IDV की इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी:
- गाड़ी गायब होना: 3 फरवरी 2020 की रात को कार पार्क की गई थी। अगली सुबह जब ड्राइवर ने देखा तो गाड़ी गायब थी।
- FASTag टोल मैसेज: इसके बाद पीड़ित को Paytm FASTag (पेटीएम फास्टैग) टोल डिडक्शन का मैसेज मिला, जिससे पता चला कि गाड़ी 4 फरवरी की रात 2:17 बजे अंबाला के पास शंभू बॉर्डर पार कर चुकी है।
- पुलिस में एफआईआर: पीड़ित ने तुरंत पुलिस में कार चोरी की एफआईआर दर्ज कराई। 20 अगस्त 2020 तक पुलिस ने अदालत में ‘अनट्रेस्ड रिपोर्ट’ (गैंग या कार का पता न चलना) दाखिल कर दी।
- दस्तावेज जमा करना: कार मालिक ने पॉलिसी कॉपी, आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, एफआईआर और अनट्रेस्ड रिपोर्ट सहित सभी जरूरी दस्तावेज बीमा कंपनी को सौंपे, जिसे कंपनी ने बेबुनियाद तर्कों के साथ खारिज कर दिया।
कंज्यूमर कोर्ट ने बीमा कंपनी के तर्कों को क्यों खारिज कर दिया?
उत्तर दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की तीन सदस्यीय पीठ- अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार, सदस्य हरप्रीत कौर छाबड़ा और अश्वनी कुमार मेहता- ने पीड़ित की शिकायत पर सुनवाई की और 14 सितंबर के अपने आदेश में बीमा कंपनी के दोनों तर्कों को पूरी तरह से “आधारहीन और मनमाना” करार दिया:
- हाई माइलेज कमर्शियल इस्तेमाल का सबूत नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल अधिक किलोमीटर चलने का मतलब यह कतई नहीं है कि गाड़ी का इस्तेमाल कमर्शियल इस्तेमाल (भाड़े/किराए) के लिए हो रहा था। बीमा कंपनी के पास इसका कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण नहीं था।
- दावों में विरोधाभास: कोर्ट ने यह भी नोट किया कि टोल डेटा को लेकर कंपनी के जवाब और उसके रिप्यूडिएशन लेटर (खारिज पत्र) में विरोधाभास था, जिसकी कंपनी कोई संतोषजनक व्याख्या नहीं दे सकी।
- दूर पार्किंग लापरवाही नहीं: आयोग ने कहा कि कार मालिक ने गाड़ी को लॉक नहीं किया था, ऐसा कोई आरोप कंपनी ने नहीं लगाया है। केवल घर से 500 मीटर दूर पार्क करने को सुरक्षा में लापरवाही नहीं माना जा सकता। जब तक कि इसका कोई पुख्ता सबूत न हो।
अदालत ने कार मालिक के हक में क्या फैसला सुनाया?
कंज्यूमर कोर्ट ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए बीमा कंपनी को पीड़ित कार मालिक को कुल मिलाकर लगभग 8 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया:
- कार का IDV क्लेम: ₹7,74,005 (गाड़ी की इंश्योर्ड वैल्यू) का भुगतान।
- ब्याज: शिकायत दर्ज करने की तारीख (13 अप्रैल 2022) से पूरे भुगतान तक इस राशि पर 7% वार्षिक ब्याज।
- मुआवजा: मानसिक उत्पीड़न, परेशानी और कानूनी खर्च के लिए अलग से ₹30,000 का हर्जाना।
पॉलिसीधारकों के लिए इस फैसले के क्या मायने हैं और मदद कहां से लें?
यह ऐतिहासिक फैसला देश भर के वाहन मालिकों और पॉलिसीधारकों के लिए एक बड़ी राहत है:
- अनुमान पर क्लेम खारिज नहीं होगा: अब कोई भी बीमा कंपनी महज अनुमानों या काल्पनिक तर्कों- जैसे “गाड़ी बहुत ज्यादा चली है” या “घर से थोड़ी दूर पार्क थी” के आधार पर जेनुइन चोरी के क्लेम को खारिज नहीं कर सकती।
- ठोस सबूत जरूरी: अगर कंपनी कोई आरोप लगाती है, तो उसे साबित करने के लिए ठोस और सत्यापित सबूत पेश करने होंगे।
बीमा क्लेम खारिज होने पर उपभोक्ता मदद कहां से लें?
- स्टेट कंज्यूमर हेल्पलाइन: दिल्ली में रहने वाले नागरिक 1800-11-4000 पर कॉल कर सकते हैं।
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन: किसी भी राज्य से उपभोक्ता मार्गदर्शन और शिकायत दर्ज कराने के लिए 1915 डायल कर सकते हैं।
- क्लेम की राशि के अनुसार उपभोक्ता सीधे जिला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकते हैं।
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