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पीटीआई नेताओं पर कार्रवाई के बीच पूर्व सीएम लापता
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पाकिस्तान हाईकोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी को लेकर प्रांतीय पुलिस प्रमुख और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को तलब किया है। बुधवार को अदालत ने 10 दिनों के भीतर उनके ठिकाने और कानूनी स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। अदालत अफरीदी के भाई की दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
अदालत ने पुलिस महानिरीक्षक, राजधानी शहर के पुलिस अधिकारी (सीसीपीओ), मुख्य सचिव और गृह सचिव से पूछा है कि क्या अफरीदी को गिरफ्तार किया गया है या किसी आपराधिक मामले में उनका नाम दर्ज है। खैबर पख्तूनख्वा में 11 अक्तूबर को बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला दे आपातकाल लागू किया गया था। इसके तुरंत बाद जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कई नेताओं के साथ अफरीदी को भी हिरासत में लिया गया था।
अफरीदी के भाई मुहम्मद आमिर ने उनकी रिहाई की मांग के लिए दायर याचिका में पूर्व मुख्यमंत्री को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप लगाया है। याचिका के मुताबिक, अफरीदी को हथियारबंद और नकाबपोश लोगों ने पेशावर में सीसीपीओ की मौजूदगी में अगवा किया था और आपातकाल या गवर्नर शासन लागू होने का हवाला देकर अफरीदी को अवैध तरीके से हिरासत में रखने को सही नहीं ठहराया जा सकता।
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन क्यों लगाया गया?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल घोषित किया था। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 232 का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही अनुच्छेद 234 के तहत गवर्नर शासन भी लागू कर दिया गया। राष्ट्रपति ने इसके पीछे बढ़ते आतंकी हमलों और प्रांत में संवैधानिक व्यवस्था के कमजोर पड़ने का हवाला दिया। इस फैसले के साथ इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का अंत हो गया। इसी दौरान पीटीआई इमरान खान की रिहाई और उन्हें चिकित्सा सुविधा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही थी।
इमरान खान की गिरफ्तारी और पीटीआई का क्या कहना है?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान 73 वर्ष के हैं और 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने से जुड़े आरोपों समेत 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि उसके संस्थापक के खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक कारणों से बनाए गए हैं। हालांकि, सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है। सोहेल अफरीदी की हिरासत और प्रांत में गवर्नर शासन लागू होने के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। फिलहाल अफरीदी के भाई ने उनकी सुरक्षित वापसी की मांग की है, जबकि पुलिस अधिकारी के अनुसार उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है।
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