फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति को लेकर छात्रों का गुस्सा बढ़ गया है। छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं। शुक्रवार को कई जगह स्कूलों के गेट बंद कर दिए गए। कुछ जगह आगजनी हुई। पुलिस के साथ छात्रों की झड़पें भी हुईं। यह आंदोलन पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ था। अब यह देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया है।
छात्रों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई के घंटे बहुत लंबे हैं। कक्षाओं में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। कई कमरों में बहुत गर्मी रहती है। शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों की कमी से भी पढ़ाई प्रभावित होती है। छात्र स्कूलों के बजट में कटौती का भी विरोध कर रहे हैं।
कितने स्कूल बंद हुए और कहां-कहां हुई आगजनी?
फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार को दिन की शुरुआत से 564 स्कूलों में प्रदर्शन या किसी तरह की रुकावट की घटनाएं सामने आईं। शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे ने कहा कि देश के करीब 3,700 हाईस्कूलों में से लगभग 400 शुक्रवार को बंद रहने की आशंका थी। कई स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई कराने की योजना भी बनाई।
पेरिस में दो हाईस्कूलों के प्रवेश द्वारों पर आग लगने से नुकसान हुआ। इनमें लियोनार्ड डी विंची और गैस्टन-बाशेलार्ड स्कूल शामिल हैं। दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। ल्योन शहर में भी प्रदर्शन के दौरान आगजनी हुई। दक्षिणी शहर मार्सेई में कई स्कूलों ने दूरस्थ पढ़ाई की व्यवस्था करने की योजना बनाई।

प्रदर्शन में कितने घायल और कितनी गिरफ्तारियां?
शिक्षा मंत्री एडौर्ड गेफ्रे के अनुसार, आंदोलन शुरू होने के बाद से करीब 170 छात्र घायल हुए हैं। कम से कम 65 कर्मचारी भी चोटिल हुए हैं। इनमें 40 हाईस्कूलों के प्रधानाचार्य शामिल हैं। इसके अलावा 100 से अधिक हाईस्कूलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
न्याय मंत्री जेराल्ड डरमानिन ने बताया कि आंदोलन शुरू होने के बाद से करीब 2,000 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया है। इनमें 90 प्रतिशत नाबालिग हैं। उन्होंने अभियोजकों से कहा है कि प्रदर्शन के दौरान बच्चों की ओर से की गई तोड़फोड़ के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराने और मरम्मत का खर्च वसूलने की कार्रवाई की जाए।
यह भी पढ़ें: ‘स्मित को कभी घबराते नहीं देखा’: भारतीय पायलट के सहकर्मियों और दोस्तों ने सुनाए पुराने किस्से; खोले कई राज
सरकार और छात्रों के बीच विवाद क्यों बढ़ा?
सरकार ने छात्रों की शिकायतों को जायज माना है। हालांकि, उसने प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की आलोचना की है। शिक्षा मंत्री का आरोप है कि कुछ हिंसक समूहों ने छात्र आंदोलन को अपने कब्जे में ले लिया है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को प्रदर्शन में जाने से रोकने की अपील की है।
दूसरी ओर, छात्रों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पुलिस आंसू गैस के गोले दाग रही है और इससे छात्र घायल हो रहे हैं। पश्चिमी फ्रांस के ब्रेस्ट शहर में केरिशेन हाईस्कूल के पास पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। रेनेस शहर में भी प्रदर्शन के दौरान तनाव देखने को मिला।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले आंदोलन पर राजनीति क्यों?
फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव में अभी आधे साल से कुछ अधिक समय बाकी है। ऐसे में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक आरोप भी लग रहे हैं। सरकार ने वामपंथी पार्टी फ्रांस अनबाउड और उसके नेता ज्यां-ल्यूक मेलेंशों पर आंदोलन के पीछे होने का आरोप लगाया है। मेलेंशों आगामी राष्ट्रपति चुनाव में फिर से उम्मीदवार हैं।
रेनेस में 16 साल की छात्रा लोला ने कहा कि उनके स्कूल का गेट बंद हो गया है और उनके हिसाब से छात्रों ने अपनी मांगों में जीत हासिल कर ली है। उसने पुलिस की कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। आंदोलन के कारण कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। फिलहाल छात्रों का विरोध जारी है।
Leave a comment