बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। शुक्रवार को गंडक नदी का पानी सारण जिले के नए इलाकों में पहुंच गया। कुछ जगहों पर तटबंध टूटने के बाद यह पानी नए क्षेत्रों में फैला। इसी बीच केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने ‘ऑरेंज’ बुलेटिन जारी किया। इसमें कई जिलों के 28 स्थानों पर गंभीर बाढ़ की स्थिति बताई गई है। दूसरी नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है।
ऑरेंज अलर्ट कब जारी होता है?
केंद्रीय जल आयोग उस समय ‘ऑरेंज’ बुलेटिन जारी करता है, जब नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर चला जाता है। लेकिन पानी का स्तर अब तक सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर से नीचे रहता है।
बुलेटिन के अनुसार, गंगा कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बहती रही। इनमें दानापुर, गांधी घाट, हाथीदह, दीघाघाट, बैंकाघाट, महनार, कल्याणपुर, कहलगांव और सुल्तानगंज शामिल हैं। दानापुर में गंगा का जलस्तर 51.44 मीटर था। यह खतरे के निशान से 0.24 मीटर ऊपर था। पटना के गांधी घाट पर जलस्तर 49.69 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर था।
सारण में किन इलाकों में पहुंचा पानी?
सारण जिले में पनापुर और मकेर प्रखंडों में क्षतिग्रस्त तटबंधों से बाढ़ का पानी बाहर आया। इसके बाद यह नए इलाकों में पहुंच गया। इनमें करछौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा शामिल हैं। गंडक नदी डुमरियाघाट, लालगंज और रेवा घाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। हालांकि, तीनों जगहों पर जलस्तर कम हो रहा था।
लालगंज में नदी का जलस्तर अपने पिछले सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर (एचएफएल) से केवल 0.15 मीटर नीचे था। कुर्सेला में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। वहीं, बलतरा में कोसी का जलस्तर घट रहा था। खगड़िया में बूढ़ी गंडक और मोहिउद्दीन नगर में बाया नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा था।
किन नदियों में बढ़ा खतरा?
अधिकारियों ने बताया कि नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के बाद कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें गंडक, गंगा, कोसी, बागमती और घाघरा नदियां शामिल हैं।
जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गंडक नदी का पानी बढ़ने से कई जिलों के तटबंधों पर खतरा बढ़ गया है। इनमें सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली, सुपौल और पटना सहित कई जिले शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर बाएं और दाएं दोनों तटबंधों पर बेहद ज्यादा दबाव पड़ रहा है।
राहत अभियान तेज हुआ
सारण में बाढ़ का पानी और ज्यादा खेतों, घरों और सड़कों में भर गया है। इसके बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) ने एक बयान में बताया कि जिले में एनडीआरएफ की 12 और एसडीआरएफ की सात टीमें तैनात की गई हैं। बाढ़ का पानी नए इलाकों में फैलने के बाद बेतिया, गोपालगंज, भागलपुर, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और पूर्वी चंपारण से अतिरिक्त टीमें भी भेजी गई हैं।
बाढ़ प्रभावित लोगों तक कैसे पहुंच रही राहत?
भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के हेलिकॉप्टर्स से बाढ़ प्रभावित इलाकों में 3,000 से ज्यादा राशन के पैकेट पहले ही गिराए जा चुके हैं। विभाग ने बताया कि शाम तक 5,000 से ज्यादा और पैकेट गिराए जाने की उम्मीद है।
एनडीआरएफ की 12 टीमों में 360 प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। ये टीमें 50 से ज्यादा नावों के साथ राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। एसडीआरएफ की टीमों में 140 से ज्यादा प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। उनके पास 36 से ज्यादा नावें हैं। विभाग ने बताया कि पूरे बिहार से सारण के लिए राहत सामग्री भी भेजी जा रही है।
जिला प्रशासन स्थिति पर नजर रख रहा है। वह राहत सामग्री वितरण की निगरानी कर रहा है। बचाव अभियान में तालमेल कर रहा है। प्रभावित इलाकों में जरूरी सेवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है।
बाढ़ में बह गए हिरणों का क्या हुआ?
इस बीच, मुजफ्फरपुर में गंडक नदी का पानी बढ़ने से 12 हिरण बह गए थे। ग्रामीणों ने पारू के पास इन हिरणों को बचाया। वन विभाग के अधिकारियों ने भी बचाव अभियान में हिस्सा लिया। बचाव अभियान प्रभारी नितिन चंद्र के नेतृत्व में अधिकारियों ने अभियान पूरा किया।
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