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भारतीय सेना को इसरो से मिली ताकत:युद्ध के समय पूरी ताकत से काम करेगा ‘नाविक’; अमेरिकी असहयोग की क्या भूमिका? – Indian Space Research Organisation Launches Nvs-03 Satellite Boosts India Navigation Capabilities

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Indian Space Research Organisation Launches NVS-03 Satellite Boosts India Navigation Capabilities

इसरो के नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण
– फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब@isroofficial5866

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिये एनवीएस-03 सैटेलाइट को उसकी सटीक कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। यह भारत के स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम ‘नाविक’ (एनएवीआईसी) की अगली पीढ़ी का तीसरा सैटेलाइट है। यह लॉन्च नाविक को फिर से पूरी तरह सटीक और आत्मनिर्भर बनाएगा। 


किसी भी नेविगेशन सिस्टम को स्वतंत्र रूप से सही स्थिति और समय बताने के लिए चार सैटेलाइट्स का लाइव सिग्नल दिखना जरूरी होता है। नाविक के कुछ पुराने सैटेलाइट्स की घड़ियां खराब होने के कारण यह संख्या कम हो गई थी। एनवीएस-03 से अब अंतरिक्ष में नाविक के पास 4 पूरी तरह एक्टिव सैटेलाइट्स हो गए हैं, जिससे यह बिना किसी विदेशी मदद के सटीक डेटा देने में सक्षम हो गया है।

युद्ध के समय पूरी ताकत से काम करेगा  

अब भारत को अमेरिकी जीपीएस या रूसी वैश्विक उपग्रह नेविगेशन प्रणाली ग्लोनास पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। युद्ध के समय यदि कोई देश अपना जीपीएस सिग्नल भारत के लिए बंद या धीमा भी कर दे, तो भी हमारे सेना का नेविगेशन सिस्टम पूरी ताकत से काम करता रहेगा। 

स्वदेशी परमाणु घड़ी : खास बात यह है कि एनवीएस-03 में भारत में ही बनी ‘रुबिडियम परमाणु घड़ी’ लगाई गई है। यह नैनोसेकंड की सटीकता से    समय बताती है, जिससे लोकेशन ट्रैकिंग बेहद सटीक हो जाएगी।  

अमेरिकी असहयोग के बाद शुरू हुआ था नाविक प्रोजेक्ट नाविक सेना के लिए एक बड़ा रणनीतिक हथियार बनने वाला है। दरअसल, नाविक प्रोजेक्ट की शुरुआत ही 1999 के कारगिल युद्ध के बाद हुई थी, जब अमेरिका ने भारत को जीपीएस डेटा देने से मना कर दिया था। अब युद्ध की स्थिति में मिसाइलों को उनके टारगेट तक सटीक तरीके से दागने, लड़ाकू विमानों के संचालन और सैन्य ड्रोन्स को गाइड करने में यह सैटेलाइट बेहद सटीक डेटा देगा।



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