{“_id”:”6aec28aad4486ca8bf0ddd17″,”slug”:”supreme-court-transfers-azam-khan-plea-against-ed-arrest-to-allahabad-high-court-hearing-on-november-16-2026-11-05″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”आजम खां को सुप्रीम कोर्ट से झटका: ईडी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर; अगली सुनवाई कब?”,”category”:{“title”:”India News”,”title_hn”:”देश”,”slug”:”india-news”}}

आजम खां
– फोटो : अमर उजाला
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खां की ईडी गिरफ्तारी का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचेगा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि 16 नवंबर को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई करे। साथ ही आजम खां की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर भी विचार किया जाए।
सुनवाई के दौरान आजम खां की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। उन्होंने अदालत में पहले दर्ज 87 एफआईआर का हवाला देते हुए कहा कि जमानत मिलने के तुरंत बाद आजम खां को एक नए मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
कपिल सिब्बल ने उठाया 87 FIR का मुद्दा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आजम खां के खिलाफ दर्ज मामलों और लगातार हो रही कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि आजम खां के खिलाफ पहले से 87 FIR दर्ज हैं और अब जमानत मिलने के तुरंत बाद उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया। सिब्बल ने इसे राजनीतिक प्रताड़ना का मामला बताते हुए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने गिरफ्तारी की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए और राहत देने की मांग की।
CJI सूर्यकांत बोले- आपकी दलील में कुछ दम हो सकता है
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कपिल सिब्बल की दलीलों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा “आपकी दलील में कुछ दम हो सकता है, लेकिन हम कोई राय व्यक्त नहीं करना चाहते।” अदालत ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर रही है।
16 नवंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने आजम खां की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजते हुए निर्देश दिया कि 16 नवंबर को डिवीजन बेंच इस पर सुनवाई करे। हाईकोर्ट को आजम खां की अंतरिम राहत की मांग पर भी विचार करना होगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों को अतिरिक्त दलीलें दाखिल करने की अनुमति भी दी है। साथ ही सभी कानूनी पक्षों को खुला रखा है, ताकि हाईकोर्ट मामले पर स्वतंत्र रूप से विचार कर सके।
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