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कंपनियां नौकरी छोड़ने का विकल्प क्यों दे रहीं:आखिर क्या है वॉलंटरी एग्जिट? कर्मचारियों को कितना फायदा होगा – Why Are Big Tech Companies Offering Voluntary Exit Packages Instead Of Layoffs Explained

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दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय खुद नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही हैं। इसे वॉलंटरी एग्जिट यानी स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना कहा जाता है। इसके तहत कंपनी कर्मचारी को एक तय रकम देती है। इसके अलावा नौकरी छोड़ने के लिए कुछ समय और करियर से जुड़ी सलाह भी दी जा सकती है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां इस तरीके को अपना रही हैं। इसका मकसद कर्मचारियों की संख्या कम करना और कामकाज में बदलाव करना है। इससे कंपनी को अचानक बड़ी संख्या में कर्मचारियों को निकालने की जरूरत कम पड़ सकती है।

किन कंपनियों ने शुरू की यह योजना?


  • कई बड़ी टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बदले आर्थिक पैकेज दे रही हैं।

  • मेटा फ्रांस में अपने करीब 300 कर्मचारियों में से लगभग 100 को स्वैच्छिक निकास का विकल्प दे रही है।

  • इसके लिए वहां कलेक्टिव कॉन्ट्रैक्चुअल टर्मिनेशन (आरसीसी) व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • माइक्रोसॉफ्ट ने भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में अपने करीब 60 हजार कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक निकास योजना पेश की है।

  • वहीं, गूगल ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में चुनिंदा कर्मचारियों के लिए इस योजना का विस्तार किया है।

कंपनियां छंटनी के बजाय यह रास्ता क्यों चुन रही हैं?


  1. बड़ी संख्या में कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकालने पर कंपनी की छवि पर असर पड़ सकता है।

  2. इससे बचने के लिए कंपनियां स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का विकल्प दे रही हैं।

  3. इसके अलावा, टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं।

  4. ऐसे में वे अपने काम और कर्मचारियों की जरूरतों का नए सिरे से आकलन कर रही हैं।

  5. कंपनियां यह देख रही हैं कि भविष्य में किस तरह के कौशल वाले कर्मचारियों की जरूरत होगी।

  6. इसी वजह से वे अपने कार्यबल में बदलाव करना चाहती हैं।

  7. स्वैच्छिक निकास से यह प्रक्रिया कम विवाद के साथ पूरी हो सकती है।

क्या कर्मचारियों के पास सच में विकल्प होता है?

कागजों पर यह योजना पूरी तरह कर्मचारी की मर्जी पर निर्भर करती है। कर्मचारी चाहे तो कंपनी का ऑफर स्वीकार कर सकता है या उसे ठुकरा सकता है। लेकिन काम की जगह पर अनिश्चितता के कारण फैसला लेना आसान नहीं होता। कई कर्मचारियों को डर रहता है कि अगर उन्होंने अभी पैकेज नहीं लिया तो भविष्य में कंपनी के पुनर्गठन या छंटनी के दौरान उनकी नौकरी जा सकती है। उस समय शायद उन्हें आज जैसा आर्थिक पैकेज भी न मिले। इसलिए कुछ कर्मचारी भविष्य की अनिश्चितता से बचने के लिए तय रकम लेकर नौकरी छोड़ना बेहतर समझते हैं।

क्या वॉलंटरी एग्जिट से छंटनी रुक जाती है?

स्वैच्छिक निकास योजना अपनाने का यह मतलब नहीं है कि कंपनी आगे कभी छंटनी नहीं करेगी। कई बार कर्मचारी इस योजना के तहत नौकरी छोड़ देते हैं, लेकिन इसके बाद भी कंपनी कर्मचारियों की संख्या घटा सकती है। उदाहरण के तौर पर, माइक्रोसॉफ्ट में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के बाद जुलाई में करीब 4,800 नौकरियां खत्म की गई थीं। इससे साफ है कि वॉलंटरी एग्जिट कंपनियों के लिए कर्मचारियों की संख्या कम करने का एक तरीका है, लेकिन यह भविष्य में होने वाली छंटनी को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं देता।

नौकरी छोड़ने से पहले किन बातों पर ध्यान दें?

अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से स्वैच्छिक निकास का ऑफर मिलता है, तो उसे जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहिए। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कंपनी कितनी रकम दे रही है और पैकेज की शर्तें क्या हैं। इसके अलावा, मिलने वाली रकम पर टैक्स कितना लगेगा, स्वास्थ्य बीमा कब तक जारी रहेगा और कंपनी के शेयर या दूसरे लाभों का क्या होगा, यह भी जांचना चाहिए। नोटिस पीरियड, बकाया वेतन और दूसरी सुविधाओं की जानकारी भी लेनी चाहिए। साथ ही, नौकरी छोड़ने के बाद नई नौकरी मिलने की संभावनाओं पर भी विचार करना जरूरी है।

क्या भारत के कर्मचारियों पर भी असर पड़ेगा?

माइक्रोसॉफ्ट की स्वैच्छिक निकास योजना में भारत में काम करने वाले पात्र कर्मचारी भी शामिल हैं। इससे पता चलता है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में हो रहे बदलाव का असर भारतीय कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है। इसलिए कर्मचारियों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय कंपनी की ऐसी योजना का ऑफर मिलने पर उसकी सभी शर्तें ध्यान से पढ़नी चाहिए। केवल मिलने वाली रकम देखकर नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं करना चाहिए। अपने खर्च, बचत, परिवार की जिम्मेदारियों और दूसरी नौकरी मिलने की संभावना को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना बेहतर होगा।



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