रैली खत्म हुई तो सड़कों से भीड़ छंटने लगी, लेकिन रविवार की कमाई का हिसाब दुकानदारों के पास रह गया। किसी ने दिनभर में 200 किलो संतरे का रस बेचकर अच्छी कमाई की, तो किसी की दूध वाली चाय की 20 लीटर तक बिक्री हुई।
रामलीला मैदान के आसपास रेहड़ी-पटरी लगाने वालों के लिए रैली में उमड़ी भीड़ ग्राहक बन गई, वहीं कनॉट प्लेस में दुकानें खुली होने के बावजूद खरीदार कम पहुंचे। पुरानी दिल्ली के थोक बाजार साप्ताहिक छुट्टी के कारण बंद रहे, जबकि सदर बाजार के पटरी बाजार में दिवाली की खरीदारी के लिए लोगों की आवाजाही बनी रही। इस तरह रैली का असर कारोबार पर अलग-अलग नजर आया।
थोक बाजार बंद, पटरी बाजार में दिवाली की रौनक :
पुरानी दिल्ली के सदर बाजार, चांदनी चौक और खारी बावली समेत प्रमुख थोक बाजार रविवार को साप्ताहिक छुट्टी के कारण बंद रहे। फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजेंद्र शर्मा बताते हैं कि इन बाजारों में रविवार को नियमित साप्ताहिक अवकाश रहता है। इसलिए दुकानों के बंद होने को रैली से हुए नुकसान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, सदर बाजार के पटरी बाजार में दिवाली की खरीदारी जारी रही। यहां त्योहार का सामान खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कनॉट प्लेस, जनपथ और पालिका बाजार में दुकानें खुली थीं, लेकिन ग्राहकों की संख्या कम रही। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव बताते हैं कि कनॉट प्लेस का पूरा बाजार खुला था, लेकिन शाम साढ़े चार बजे तक कारोबार की रफ्तार करीब पांच से 10 प्रतिशत ही रही।
राहुल की अपील पर छोटे दुकानदारों से खरीदारी :
रैली में शामिल होने आए कुछ लोगों ने बताया कि राहुल गांधी की अपील के बाद उन्होंने स्थानीय दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों से सामान खरीदा। राजस्थान से आए जिग्नेश ने बताया कि वह छोटे दुकानदारों की मदद करना चाहते थे। कई लोगों ने रामलीला मैदान के आसपास चाय, चना और झालमुड़ी खरीदकर रेहड़ी-पटरी वालों का साथ दिया।
सीटीआई का दावा- व्यापार को 11 हजार करोड़ का नुकसान
सीटीआई अध्यक्ष बृजेश गोयल का दावा है कि रैली के कारण दिल्ली के व्यापार को करीब 10 से 11 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उनके मुताबिक, 20 से 25 प्रमुख बाजारों में करीब ढाई लाख दुकानें बंद रहीं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, चावड़ी बाजार, दरियागंज, कमला मार्केट, पहाड़गंज, करोल बाग और कश्मीरी गेट शामिल हैं। गोयल की दलील है कि जाम की आशंका के चलते दिल्ली के आसपास के शहरों से तीन से चार लाख खरीदार बाजारों तक नहीं पहुंचे। करीब पांच हजार मालवाहक वाहन भी बाजारों तक नहीं पहुंच सके। संगठन ने माल ढुलाई, होटल, रेस्तरां और पर्यटन कारोबार पर भी असर पड़ने का दावा किया।
चना, झालमुड़ी और जूस वालों की रही चांदी
रामलीला मैदान के आसपास रविवार को खाने-पीने का सामान बेचने वालों की अच्छी बिक्री हुई। रैली में शामिल होने आए लोगों ने रास्ते में रुककर चना, झालमुड़ी, चाट, जूस और चाय खरीदी। मिंटो ब्रिज के पास जूस विक्रेता रामदयाल ने बताया कि दिनभर में करीब 200 किलो संतरे का रस बिक गया। वहीं, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास चाय बेचने वाले किशोर के मुताबिक, उसकी करीब 20 लीटर दूध वाली चाय की बिक्री हुई। रैली की भीड़ ने इन छोटे कारोबारियों को कमाई का मौका दिया।
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