ईरान की इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की एयरोस्पेस फोर्स ने अपना विशेष स्मृति सप्ताह मनाया। इस दौरान उसने अपनी तकनीकी उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उसने क्षेत्रीय रक्षा क्षमताओं और सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर भी कई बातें सामने रखीं।
तेहरान के सरचेशमेह कल्चरल कॉम्प्लेक्स में शनिवार को अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज एजेंसी ने इसकी रिपोर्ट दी है।
स्मृति सप्ताह की शुरुआत में क्या बोले आईआरजीसी प्रवक्ता?
आईआरजीसी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत की। उन्होंने पुराने क्षेत्रीय युद्धों से जुड़े प्रमुख लोगों और शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा, एयरोस्पेस वीक, एयरोस्पेस फोर्स के शहीदों, उसके पूर्व सैनिकों, कमांडरों और उनके सम्मानित परिवारों को श्रद्धांजलि देने का एक कीमती अवसर है। साथ ही, यह आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स की प्रमुख उपलब्धियों और प्रदर्शन को सामने लाने का भी मौका है।
जमीन के नीचे कितने मिसाइल ठिकाने बनाए?
पत्रकारों से बात करते हुए प्रवक्ता ने बताया कि ईरान ने जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर मिसाइल ठिकाने बनाए हैं। इन ठिकानों को बनाने में देश की अपनी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, ईरान की भौगोलिक परिस्थितियों का भी फायदा उठाया गया है।
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हाल के सैन्य संघर्षों के बाद ईरान की वायु रक्षा प्रणाली में तेजी से बदलाव आया है। मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में भी इस बात का जिक्र किया गया है। जनरल मोहेब्बी ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के दौरान उसकी वायु रक्षा इकाइयों ने ‘दुश्मन’ के 260 विमानों को रोका और मार गिराया।
बमबारी के बीच भी जारी रखा मिसाइल और ड्रोन का उत्पादन
उन्होंने कहा, लचीली उत्पादन क्षमताएं विकसित करके और दुश्मन की बमबारी के बीच भी मिसाइलों और ड्रोनों का निर्माण जारी रखकर, हम उत्पादन केंद्रों को जमीन के ऊपर से जमीन के नीचे ले जाने में कामयाब रहे।
उन्होंने आगे कहा, विशेष उपकरणों को आईआरजीसी एयरोस्पेस वीक के दौरान प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आम लोग उन्हें करीब से देख सकेंगे। अधिकारी ने यह भी बताया कि पिछले दो हफ्तों के दौरान सात टोही विमानों को सुरक्षित हालत में बरामद किया गया है।
सात एमक्यूएम-170 टोही ड्रोन बरामद करने का दावा
प्रवक्ता ने कहा, पिछले एक-दो हफ्तों में हमने सात एमक्यूएम-170 टोही ड्रोन को बिना नुकसान पहुंचाए अपने कब्जे में लिया है। यह दुश्मन के मुकाबले हमारी तकनीकी बढ़त का सबूत है।
उन्होंने आगे कहा, अगर फिर से कोई युद्ध छिड़ता है, तो दुनिया आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स की नई क्षमताओं को देखेगी। हमारे दुश्मन इसकी ताकत और शक्ति देखकर हैरान रह जाएंगे।
ईरान ने अपनी रक्षा ताकत कैसे बढ़ाई?
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईरान ने अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन बुनियादी स्तंभों पर काम किया है। उन्होंने इन तीनों स्तंभों को देश के सैन्य विकास का आधार बताया।
उन्होंने बताया, पहला स्तंभ एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत ईरान ने देश के भीतर ही वैज्ञानिक विशेषज्ञ और तकनीक विकसित करने पर जोर दिया है। मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में भी इसका जिक्र किया गया है।
मोहेब्बी ने कहा, इस विकास से देश के रक्षा और हमलावर हथियार उद्योग में बड़े बदलाव आए। पहले हम दूसरे देशों से सैन्य हथियार खरीदते थे। लेकिन अब हम एयरोस्पेस क्षेत्र में हथियारों का निर्यात करने वाले देश बन गए हैं।
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